सह-कुत्तत्व, सह-इंसानियत

फोटो , , शनिवार , 16-09-2017


Co-dogma, co-humanity

रंजना रावत

कुत्ते की मालकिन और कुत्ता  समान ऊंचाई पर हों, बराबरी की बेंच पर बैठें, तो कुत्ता महसूस कर सकता है कि सह-कुत्तत्व की भावना जोर पकड़ रही  है और इंसानों को लग सकता है कि यही तो है इंसानियत.

पर सह-कुत्तत्व का एक अर्थशास्त्र है - कुत्ता  महँगा है, उस पर इसके शैम्पू, उसके रख- रखाव में खर्च भी खासा है. शैंपू वगैरह करके मिट्टी में खेलेगा, तो गंदा हो जायेगा, सो साथ बराबर बैठा लो. 

बराबरी के स्रोत कई बार अर्थशास्त्र में भी छिपे होते हैं.


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