डीजीपी लूथरा ने चंडीगढ़ को अभेद्य बनाए रखा

व्यक्तित्व , , शनिवार , 16-09-2017


DGP Luthra kept Chandigarh untested


चंडीगढ़ से पंचकूला की दूरी महज 10 किमी है पर जब राम-रहीम को सीबीआई की विशेष कोर्ट द्वारा बलात्कार का दोषी घोषित किए जाने के बाद पंचकुला जल रहा था और 30 से अधिक लोग मारे गए थे, वहीं चंडीगढ पूरी तौर पर शांत था.   

इस यूनियन टेरीटरी, जो कि पंजाब व हरियाणा दोनों की राजधानी है व जहां डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम-रहीम का खासा दबदबा है, को पूर्णत: शांत बनाए रखने का श्रेय चंडीगढ़ के पुलिस महानिदेशक तजेन्द्र सिंह लूथरा को जाता है. वे चंडीगढ़ के इंट्री पाइंट पर खुद तैनात थे .

 स्थानीय रिपोर्टों में बताया गया कि चंडीगढ़ में भी पंचकुला जैसी हिंसा हुई होती यदि चंडीगढ़ पुलिस प्रमुख ने समय से ठोस निर्णय नहीं लिया होता. ऐसा हुआ कि लूथरा को एक वरिष्ठ हरियाणा इंटेलीजेंस अधिकारी का एक फोन आया. वह अधिकारी चाहता था कि चंडीगढ़ पुलिस गुरमीत राम-रहीम का 308 गाडि़यों का काफिला पंचकुला जाने के लिए शहर से गुजरने दे. यह जेाखिम भरा प्रस्ताव था क्योंकि उससे राम-रहीम के समर्थक व सहयोगी उपद्रव कर सकते थे. लूथरा ने यह जोखिम भांप कर हरियाणा के उक्त अधिकारी का प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया. पहले के निर्धारित शेड्यूल के अनुसार काफिले को जीरकपुर से होकर पंचकूला ले जाने का था जिस रास्ते में चंडीगढ़ नहीं पड़ता. लूथरा ने जानना चाहा कि यह रूट क्यों बदला गया. क्योंकि मूल रूट हरियाणा पुलिस द्वारा ही तय किया गया था.

 डीजीपी लूथरा ने जीरकपुर में पंजाब-चंडीगढ़ सीमा पर पहली पुलिस चेकपोस्ट को चौकस किया. उन्होंने और पुलिसबल चेकपोस्ट पर भेजा. राम-रहीम के काफिले के पहुंचने की सूचना के बाद लूथरा ने चंडीगढ़ पुलिस का एक पायलट वाहन इस बहाने से भेजा कि वह यूनियन टेरीटरी से होकर पंचकुला जाने के लिए गाइड का काम करेगा. इससे हरियाणा इंटेलीजेंस अधिकारी व अन्य लोगों ने सोचा कि लूथरा दबाव में आ चुके हैं.

 हरियाणा के अधिकारी से कोई उचित उत्तर न पाकर लूथरा ने चंडीगढ़ में राम-रहीम के काफिले को प्रवेश की अनुमति देने से मना कर दिया. किन्तु मामला यहीं नहीं थमा, उस अधिकारी ने अब दबाव बनाना शुरु किया कि काफिला चंडीगढ़ से होकर ही पंचकुला जाने दिया जाए. हरियाणा के अधिकारी ने चंडीगढ़ से काफिले को न गुजरने देने के लिए लूथरा को चुनौती दी.

 खतरा निकट भांप कर डीजीपी लूथरा ने किसी अन्य पुलिस अधिकारी, अन्य वरिष्ठ अधिकारियों या राम-रहीम के जेड प्लस सुरक्षा कार्मिकों  से पूछने के बजाय निजी तौर पर स्थिति पर काबू पाने का प्रयत्न किया. तब तक यह नहीं पता था कि जेड प्लस सुरक्षा दल के सदस्य दोषी घोषित राम-रहीम को भगा ले जाने की फिराक में हैं. लेकिन इस पूरे षड्यंत्र को पंचकुला कोर्ट में उपस्थित अधिकारियों ने बेनकाब कर दिया तथा इस षड्यंत्र में शामिल सुरक्षा कार्मिकों को कस्टडी में ले लिया गया.  

चूंकि चंडीगढ़ पुलिस शहर की सड़कों से वाकिफ थी, लूथरा की योजना के अनुसार एक स्मार्ट मूव के तहत पायलट वाहन  ने काफिले को जीरकपुर – चंडीगढ़ हाइवे से होकर गलत साइड से निकालते हुए चंडीगढ़ के बाहर से निकाल ले गया. जब तक हरियाणा इंटेलीजेंस व पुलिस अधिकारी यह माजरा समझ पाते तब तक वे एक भिन्न दिशा की ओर जा चुके थे. इस तरह राम-रहीम का कोई भी वाहन चंडीगढ़ में प्रवेश नहीं कर सका तथा चंडीगढ शांत बना रहा. जबकि चंडीगढ़ पहले से ही हाई एलर्ट पर था.

 (रपट : उपलब्ध स्रोतों के आधार पर)  


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