लोन देने में हिचक रहे हैँ बैंक

रिजर्व बैंक के निर्देश के बाद उद्यमियों को बैंकों से बिना सिक्योरिटी ऋण की सुविधा मिलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उद्यमियों का आरोप है कि बैंक अपने रिकार्ड बचाने के लिए ऋण देने के नियमों को नहीं मान रहे हैं.

| डेस्क

गंभीर समचार 04 Jun 2020

रिजर्व बैंक के निर्देश के बाद उद्यमियों को बैंकों से बिना सिक्योरिटी ऋण की सुविधा मिलने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. उद्यमियों का आरोप है कि बैंक अपने रिकार्ड बचाने के लिए ऋण देने के नियमों को नहीं मान रहे हैं.

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पूर्व यूपी प्रेसीडेंड सुनील वत्स कहते हैं “आरबीआइ के निर्देशों के मुताबिक बैंकों को बिना गारंटी ऋण देने या सीसी लिमिट के बीस फीसदी तक ऋण जारी करने के निर्देश दिए गए हैं. लेकिन बैंक इस बारे में कोई उत्साह नहीं दिखा रहे हैं. इससे उद्यमियों को काफी दिक्क्तें आ रही है.”

लखनऊ के चिनहट में कार पार्ट्स की फैक्ट्री चलाने वाले रमेश गुप्ता बताते हैं कि सरकार ने कई स्तरों पर राहत की घोषणा की है लेकिन इसका फायदा मिलने में उद्यमियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. गुप्ता बताते हैं “बिजली का फिक्सड चार्ज हो या जीएसटी रिफंड, अबतक उद्यमियों को कोई मदद नहीं मिल पायी है.”

औद्योगिक संगठनों का यह भी आरोप है कि लाकडाउन में आरबीआइ ने इंडस्ट्री को इएमआइ में राहत देने का जो ऐलान किया था उसे भी बैंक नहीं मान रहे हैं. इंस्ट्रीज एसोसिएशन के एक पदाधिकारी राहुल महरोत्रा बताते हैं “आइबीआइ ने इएमआइ के संबंध में 27 मार्च को नोटिफिकेशन जारी कर दिया था, उसके बाद भी ज्यादातर बैंक और एनबीएफसी बैंकों को राहत नहीं दे रहे हैं.”

उधर, बैंकों और एनबीएफसी से जुड़े लोगों का तर्क है कि आरबीआइ ने इएमआइ की सुविधा उन्हीं लोगों को दी है जिनकी सैलरी लेट आई है या नहीं आई है या वे इंडस्ट्रीज जिन्हें नकदी का संकट है. इसके लिए प्रमाण भी मांगा जा रहा है. इंडस्ट्रीज से जुड़े लोग बैंकों के प्रमाण मांगने को नजायज ठहरा रहे हैं. इनका तर्क है कि लाकडाउन में प्रमाण कहां से लाया जाए.

उधर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कोरोना संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए प्रदेश में 58 हजार ग्रामीण महिलाओं को ‘बैंकिंग कोरेस्पांडेंट सखी' बनाने की घोषणा की है. इन्हें काम शुरू करने पर छह माह तक चार हजार रुपये महीने दिए जाएंगे. बैंकिंग कामकाज के लिए करीब 50 हजार रुपये कीमत की डिवाइस भी सभी सखियों को दी जाएंगी.

बैकिंग कोरेस्पांडेंट सखी बनने वाली ग्रामीण महिलाएं बैंकों से जुड़कर ग्रामीणों को उनके घर पर ही बैंकिंग लेन-देन तथा अन्य कामों में सहयोग करेंगी. ग्रामीणों को बैंक नहीं जाना होगा. समस्त लेन-देन डिजिटल किए जाएंगे. मुख्यमंत्री ने ग्राम्य विकास विभाग के मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ‘मोती सिंह' और उ.प्र. राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के निदेशक सुजीत कुमार को निर्देश दिए कि जल्द से जल्द सखियों को तैनात करने की व्यवस्था की जाए.