‘अंफान’ ने झकझोरा बंगाल का सियासी समीकरण

पश्चिम बंगाल इस कोरोना काल में भी सियासत का अखाड़ा बना हुआ है. आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पक्ष-विपक्ष दोनों ही एक दूसरे पर बढ़त बनाये रखना चाहते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का तूफान प्रभावित क्षेत्रों का दौरा भविष्य के सियासी समीकरण को ध्यान में रख कर किया गया है , तो वहीं ममता बदहाल आर्थिक स्थिति से जूझ रहे राज्य को केंद्र की सहायता लेकर जनता के सामने अपना स्कोर बनाने में जुटी है. अभी यह सियासी जंग और ज्यादा तिक्ष्ण होगा...

| अनवर हुसैन

गंभीर समचार 04 Jun 2020

लगता है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सियासत मोदी-शाह के विरोध पर टिकी है. उनके निशाने पर हर समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह भी रहते हैं. हालांकि वह प्रदेश भाजपा नेताओं पर भी प्रहार करने का कोई मौका ममता नहीं गंवाती है. कोरोना संक्रमण के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार के साथ ममता बनर्जी का टकराव खुल कर सामने आया. इसलिए कि प्रदेश भाजपा ने जब पश्चिम बंगाल में ठीक से लॉकडाउन का पालन नहीं होने तथा कोरोना संक्रमण पर तथ्य छिपाने का आरोप लगाया तो गृहमंत्रालय ने बंगाल में केंद्रीय टीम भेज दी. ममता ने केंद्रीय टीम पर आपत्ति जताई और राज्यपाल के जरिए राज्य सरकार के अधिकार में हस्तक्षेप करने का आरोप लगाया. इस पर राज्यपाल ने भी ममता सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी ममता पर कोरोना संक्रमण की रोकथाम और पीड़ितों को राशन वितरण करने में राजनीतिक भेदभाव करने का आरोप लगाया. केंद्र सरकार के साथ खींचतान के बीच बंगाल में राजनीतिक समीकरण उस समय एक दिलचस्प मोड़ पर पहुंचते दिखा जब ममता ने चक्रवाती तूफान अंफान से मची तबाही के मंजर को देखने के लिए सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया. चक्रवाती तूफान अंफान ने बंगाल की राजनीतिक बिसात को भी गडमगड्ड कर दिया और पुराने मोहरे छितर-बितर हो गए. इस तरह बंगाल में एक नई राजीतिक समीकरण की सुगबुगाहट तेज हो गई है. हालांकि यह ऊपर से दिखने में भले ही वास्तविक और व्यवहारिक न लगे लेकिन राजनीति में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कुछ भी असंभव नहीं होता है.

बहरहाल, प्रधानमंत्री ने जिस तरह ममता का आमंत्रण स्वीकार किया और तुरंत व बंगाल में तूफान प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण करने पहुंच गए, इसे लेकर राजनीतिक अटकलों का बाजार गर्म है. राज्य में तूफानग्रस्त क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के लिए प्रधानमंत्री जिस हेलीकाप्टर में सवार हुए उसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल जगदीप धनखड़ भी थे. राज्यपाल और ममता में इतनी खटास बढ़ गई थी कि दोनों एक दूसरे का चेहरा तक देखना पसंद नहीं करते. लेकिन प्रधानमंत्री के साथ जब दोनों एक ही हेलीकाप्टर में बैठे तो जाहिर है राज्य के संवैधानिक प्रधान के साथ ममता का मनमुटाव कुछ हद तक दूर हुआ और इसका श्रेय बेसक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जाएगा.

प्रधानमंत्री ने ममता के साथ राज्य के तूफानग्रस्त क्षेत्रों विशेषकर तटवर्ती जिला दक्षिण 24 परगना और उत्तर 24 परगना के कुछ विशेष इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया. उसके बाद उन्होंने उत्तर 24 परगना के बशीरहाट में मुख्यमंत्री के साथ प्रशासनिक बैठक की जिसमें तक्रवाती तूफान ‘अंफान’ से राज्य में हुई क्षति की समीक्षा की. बैठक के बाद प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल को तत्काल राहत पहुंचने के लिए अग्रिम 1000 करोड़ रुपए की अंतरिम आर्थिक मदद देने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि दुख की इस घड़ी में पूरा देश पश्चिम बंगाल के साथ हैं. उन्होंने मृतकों के परिजनों को दो लाख और घायलों को भी 50 हजार रुपए मुआवजा देने की घोषणा की. साथ ही प्रधानमंत्री ने कोरोना संक्रमण के बीच चक्रवाती तूफान से बचाव के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना भी की.

उल्लेखनीय है कि पिछले सप्ताह चक्रवाती तूफान अंफान ने कोलकाता के आस-पास तटवर्ती क्षेत्रों में करीब 400 किलो मीटर क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है. विस्तृत क्षेत्र में फसलों का भारी नुकसान हुआ है और 80 से अधिक लोगों की मौत हुई है. प्रधानमंत्री, ममता के अनुरोध पर राज्य में इसी तबाही का मंजर देखने पहुंचे और बंगाल की जनता को तत्काल राहत पहुंचाने के लिए उन्होंने राज्य को तत्काल एक हजार करोड़ रुपए की आर्थिक मदद देने की घोषणा की.

हालांकि ममता ऊपरी तौर पर जाहिर कर रहीं है कि वह केंद्र की इतनी कम आर्थिक मदद से वह संतुष्ट नहीं हैं. उनका दावा है कि तूफान में बंगाल में एक लाख करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है. ऐसे में एक हजार करोड़ रुपए की आर्थिक मदद कोई मायने नहीं रखती है. लेकिन प्रधानमंत्री ने भी ममता के इस तरह की शिकायतों या आरोपों को झूठलाने का विकल्प तैयार कर रखा है. उन्होंने कहा है बंगाल को अग्रिम एक हजार करोड़ रुपए सहायता राशि दी गई है. केंद्रीय टीम भी बंगाल के तूफानग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करेगी. उसके बाद राज्य सरकार की भी क्षति पर जब पूर्ण रिपोर्ट मिलेगी तो और आर्थिक मदद देने पर विचार किया जाएगा. प्रधानमंत्री ने बंगाल की जनता को आश्वस्त किया कि संकट की घड़ी में केंद्र उनके साथ है.

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि अगले साल पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को ध्यान में रख कर भाजपा और सत्तारूढ़ दल तृणमूल कांग्रेस अपने-अपने राजनीतिक दांव चल रही हैं. पीएम भी ममता के आमंत्रण पर इसलिए बंगाल में तूफानग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने पहुंच गए ताकि बंगाल की जनता के बीच अच्छा संदेश जाए. ममता भी इस लिए केंद्र के प्रति नरम हुई, क्योंकि कोरोना के कारण राज्य में भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. रही सही कसर चक्रवाती तूफान अंफान ने पूरी कर दी. ममता को समझ में आ गया कि केंद्र से टकराव उनके लिए महंगा पड़ सकता है और संकट की घड़ी में जनता को राहत नहीं मिली तो चुनाव में इसका खामियातजा भी भुगतना पड़ सकता है. इसलिए उन्होंने केंद्र और खास कर पीएम मोदी के प्रति अपने रुख में परिवर्तन किया. हालांकि प्रदेश के भाजपा नेता अभी भी ममता विरोध पर अड़े हैं. केंद्र के साथ ममता के संबंध सुधरने को लेकर प्रदेश भाजपा के नेता असमंजस में हैं वहीं कांग्रेस और वाममोर्चा के नेता भी अब अपनी अलग रणनीति बनाने में जुटेंगे.

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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