थानेदार की रहस्यमयी आत्महत्या और सियासत

राजस्थान में इन दिनों सियासी पारा बढ़ता जा रहा है, चुरू जिले के राजगढ़ थानाधिकारी विष्णुदत्त विश्नोई की आत्महत्या ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में भूचाल खड़ा कर दिया है. राजस्थान के सिंघम कहे जाने वाले थानाधिकारी विष्णु दत्त बिश्नोई का शव उनके सरकारी आवास पर फांसी के फंदे पर लटका मिला जिसके बाद प्रशासन व सियासी जगत में हड़कंप मच गया.

| जयेश पाण्डेया

गंभीर समचार 04 Jun 2020

राजस्थान में इन दिनों सियासी पारा बढ़ता जा रहा है, चुरू जिले के राजगढ़ थानाधिकारी विष्णुदत्त विश्नोई की आत्महत्या ने प्रदेश की राजनीति और प्रशासन में भूचाल खड़ा कर दिया है. राजस्थान के सिंघम कहे जाने वाले थानाधिकारी विष्णु दत्त बिश्नोई का शव उनके सरकारी आवास पर फांसी के फंदे पर लटका मिला जिसके बाद प्रशासन व सियासी जगत में हड़कंप मच गया. थानाधिकारी बिश्नोई ने सुसाईड नोट में लिखा है कि वे दबाव को झेल नहीं पाए और ऐसा कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा. प्रारम्भिक तफ्तीश में सामने आया की बिश्नोई पिछले कुछ दिनों से तनाव में थे तथा नौकरी छोड़ना चाहते थे. 

दरअसल, बिश्नोई की छवि विभाग में एक ईमानदार अफसर की थी. जिसने अपने क्षेत्र में कई तरह के अपराधों पर अंकुश लगाया था. शराब माफिया हो या विभिन्न मादक पदार्थों के तस्कर हो सभी के आंखों की किरकिरी बने बिश्नोई ने क्षेत्र की जनता का दिल जीत लिया था. लेकिन बिश्नोई पर ऐसा कौन सा दबाव आया कि उन्हें आत्महत्या जैसा कदम उठाना पड़ा?

सुसाइड नोट में विश्नोई ने लिखा है कि उनके चारों तरफ इतना दबाव था कि वे इसे झेल नहीं सके. उन्होंने ख़ुद के तनाव में होने की बात कही. वकील को मैसेज भेज कर उन्होंने लिखा कि उन्हें गन्दी राजनीति के भंवर में फंसा दिया गया है. इसी मैसेज में उन्होंने बताया था कि वे सेवा से मुक्त होना चाहते हैं. उन्होंने लिखा था कि थाना भवन के निर्माण में उन पर 3.5 करोड़ रुपए का गबन का आरोप मढ़ा जा रहा है. 

थाने का पूरा स्टाफ क्यों चाहता है ट्रांसफर ?

सीआई विष्णु दत्त विश्नोई सुसाइड केस के बाद थाने का अधिकतर स्टाफ ट्रांसफर चाहता है. सीआई के सुसाइड के बाद थाने के स्टाफ ने बीकानेर रेंज के आईजी को लैटर लिखा है कि वे भी थाना छोड़ना चाहता हैं, उनका भी ट्रांसफर कर दिया जाए. इस थाने से और शहर के अन्य थानों में लगा दिया जाए. इसमें अधिकतर पुलिस कार्मिकों ने हस्ताक्षर भी किए हैं. हांलाकि इस लैटर के बारे में अफसर मीडिया से कुछ बोल नहीं पाए.

सांसद व विस में उपनेता प्रतिपक्ष धरने पर तो विधायक के खिलाफ लगे नारे

थानाधिकारी की आत्महत्या की जानकारी मिलते ही चुरू के युवा सांसद राहुल कस्वा और विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ थाने पहुंच गए तथा उच्चस्तरीय जांच की मांग पर धरने पर बैठ गए. दोनों भाजपा नेताओं के साथ पूर्व बसपा विधायक व कुछ अन्य स्थानीय नेता भी धरने पर बैठे जिससे प्रदेश की सियासत में हड़कंप मच गया. प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी ट्वीट कर घटना पर खेद जताया. इसके बाद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी खेद जताते हुए कहा कि वे शोकाकुल परिवारजनों के साथ है तथा इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाएगी. 

इधर, थानाधिकारी के शव को मोर्चरी रूम में ले जाने की बात पर नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ व पुलिस अधिकारी के बीच कहासुनी हुई. डीएसपी रामप्रताप बिश्नोई विष्णुदत्त के शव को मोर्चरी या अन्य किसी सुरक्षित स्थान पर ले जाना चाह रहे थे. राजेंद्र सिंह ने उन्हें रोका और परिवार के सदस्यों की इजाजत जरूरी बताई. इससे रामप्रताप ने आवेश में यह कह दिया कि आप रोकने वाले कौन होते हो, यह कानून व्यवस्था का मामला है. राठौर ने भी बिश्नोई को जमकर खरी-खोटी सुनाई. लोगों ने भी पुलिस के खिलाफ नारे लगाए. भाजपा नेताओं ने डीएसपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. डीएसपी रामप्रताप को चूरू रवाना करने पर मामला शांत हुआ. आत्महत्या की घटना से आक्रोशित जनता ने क्षेत्रीय कांग्रेस विधायक कृष्णा पूनिया के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी. नारेबाजी करने वालों का आरोप था कि थानाधिकारी ने विधायक के दबाव में आकर आत्महत्या की है. वहीं कृष्णा पूनिया ने कहा है कि विश्नोई से 5-7 बार बैठक में ही उनकी मुलाकात हुई थी. विधायक ने बताया कि उन्होंने विश्नोई के बारे में सुन रखा था, लेकिन कभी अकेले में मुलाक़ात नहीं हुई.

विश्नोई के बारे में ये भी कहा जा रहा है कि वो अपने थाने के कुछ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किए जाने से नाराज़ थे. आरोप है कि विधायक पूनिया ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से बात कर ऐसा कराया था. अब तक 13 थानों में रह चुके विश्नोई की आत्महत्या के मामले में एक क्षेत्रीय गैंगस्टर की गैंग का नाम भी सामने आ रहा है, क्योंकि वो जिस मर्डर केस की जांच कर रहे थे, उसके तार इसी गैंग से जुड़े थे.

कौन हैं कृष्णा पूनिया

राष्ट्रमंडल खेल 2010 की स्वर्ण पदक विजेता चक्का फेंक खिलाड़ी कृष्णा पूनिया गत विधानसभा चुनावों में सादुलपुर विधानसभा सीट से विधायक चुनी गई है. पूनिया ने दूसरी बार विधायक का चुनाव लड़ा था. पिछले चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. युवाओं और खेलों से जुड़े लोगों के बीच कृष्णा पूनिया काफी सम्मानित व्यक्तित्व हैं. उन्होंने डिस्कस थ्रो में 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल और और दो बार एशियन गेम्स में ब्रॉन्ज मेडल जीता है. पूनिया हरियाणा के हिसार की रहने वाली हैं और 1999 में शादी के बाद से चुरू में रह रही हैं. उनके पति विरेंदर भी इंटरनेशनल एथलीट होने के साथ पत्‍नी के कोच भी रहे हैं और द्रोणाचार्य पुरस्‍कार विजेता हैं. कृष्‍णा पूनिया 2012 के ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्‍व कर चुकी हैं. भारत सरकार ने इन्हें वर्ष 2010 में अर्जुन पुरस्कार तथा वर्ष 2011 में ने पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया है.

सीबीआई जांच की मांग

विश्नोई के मित्र वकील गोवर्धन सिंह का कहना है कि ये दिखने में भले आत्महत्या लगे, लेकिन ये सोच-समझ कर की गई हत्या है. इसकी सच्चाई सीबीआई जांच के बिना सामने नहीं आएगी. 21 साल से सेवारत विश्नोई वरिष्ठ अधिकारियों के भी चहेते थे.

वहीं राजस्थान के डीजीपी भूपेंद्र सिंह ने कहा है कि उनकी नज़र में विष्णुदत्त राज्य के शीर्ष 10 एसएचओ में शामिल थे. पुलिसकर्मियों के लिए राजनीतिक, सामाजिक और आपराधिक दबाव आम बात है, जो विभाग में भर्ती के पहले दिन से ही शुरू हो जाता है. उन्होंने कहा कि सभी क्षेत्रों के वरिष्ठ अधिकारी सिफारिश करते थे कि अपराध को नियंत्रित करने के लिए उनके इलाक़े में विष्णुदत्त की पोस्टिंग की जाए.

चूरू के राजगढ़ में भी अपराध नियंत्रण के लिए ही विष्णुदत्त की पोस्टिंग की गई थी. डीजीपी भूपेंद्र सिंह के अनुसार वहां उन्होंने अच्छा काम किया था, लेकिन आत्महत्या के पहले कैसी परिस्थितियां बनीं, ये जांच का विषय है. उन्होंने कहा कि विष्णुदत्त विश्नोई ऐसे अधिकारियों में से थे, जो हमेशा ईमानदारी से काम करते थे. उन्होंने कहा कि किसी भी अनुसन्धान के दौरान दोनों पक्ष दबाव बनाने के लिए तिकड़म आजमाते हैं और पुलिस के लिए निष्पक्ष कार्रवाई करना एक चुनौती रहती है.

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