नीम की कड़वाहट से भागेगा कोरोना वायरस

प्राचीन काल से ही नीम का पेड़ हमारी सेहत का साथी रहा है. इसकी दातून, पत्ती, छाल से लेकर तेल तक औषधीय गुणों से भरपूर हैं. अब यही नीम अब कोरोना के खिलाफ लड़ाई में काम आएगी. इसकी पत्तियों में मौजूद तत्व कोविड-19 के प्रकोप से बचाने में मददगार बनेंगे. इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए लखनऊ स्थित केजीएमयू अब मॉर्डनपैथी के साथ-साथ प्राचीन पद्धित पर भी फोकस करेगा. इसके लिए फिजियोलॉजी की चिकित्सक ने नीम के प्रभाव पर गहन अध्ययन के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया है. साथ ही भर्ती मरीजों को भी उसकी पत्तियों का पेय बनाकर

| डेस्क

गंभीर समचार 04 Jun 2020

प्राचीन काल से ही नीम का पेड़ हमारी सेहत का साथी रहा है. इसकी दातून, पत्ती, छाल से लेकर तेल तक औषधीय गुणों से भरपूर हैं. अब यही नीम अब कोरोना के खिलाफ लड़ाई में काम आएगी. इसकी पत्तियों में मौजूद तत्व कोविड-19 के प्रकोप से बचाने में मददगार बनेंगे. इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए लखनऊ स्थित केजीएमयू अब मॉर्डनपैथी के साथ-साथ प्राचीन पद्धित पर भी फोकस करेगा. इसके लिए फिजियोलॉजी की चिकित्सक ने नीम के प्रभाव पर गहन अध्ययन के लिए प्रोजेक्ट तैयार किया है. साथ ही भर्ती मरीजों को भी उसकी पत्तियों का पेय बनाकर देने का सुझाव दिया है.

यहां की फिजियो विभाग की टीम कोविड-19 पर नीम के प्रभाव को जांचने परखने में जुटी हैं. उन्होंने नीम में मौजूद औषधीय तत्व, इंफ्लूएंजा वायरस पर इसके असर तथा सॉर्स कोव-टू की संरचना से जुड़े शोध का अध्ययन किया. ऐसे में अब नीम लीफ एक्सट्रैक्ट के प्रभाव पर विस्तृत शोध का फैसला किया है, ताकि विश्व स्तर पर इसके महत्व को साबित किया जा सके. इसके लिए रिसर्च प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसे मंजूरी के लिए जल्द ही डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी को भेजेंगी. वहीं केजीएमयू में भर्ती मरीजों को भी नीम की पत्ती का पेय देने का सुझाव दिया है.

नीम में एंटीवायरल तत्व होते हैं. इसके प्रमुख कंपोनेंट हाइप्रोसाइड, मिंबाफ्लेवोन व रूटीन हैं. वहीं हाइप्रोसाइड तत्व कोविड-19 के लिए असरकारी है. यह सामान्य व्यक्तियों को जहां कोरोना के संक्रमण से बचा सकता है. वहीं संक्रमित मरीजों को शुरुआत में देने से उनकी हालत बिगडऩे से रोक सकता है. कोरोना के 81 फीसद माइल्ड केस होते हैं. इनके लिए नीम की पत्ती का पेय बेहद उपयोगी साबित होगा.

कोरोना आरएनए वायरस है. यह रिसेप्टर के जरिए शरीर की कोशिका में प्रवेश करता है. वहीं नीम में मौजूद हाइप्रोसाइड तत्व सेल पर मौजूद रिसेप्टर को ब्लॉक कर देता है. ऐसे में वायरस व्यक्ति के सेल में नहीं पहुंच पाएगा. पॉजिटिव मरीज को शुरुआती दौर में ही नीम पत्ती का पेय देने से हाइ्रड्रोसाइड तत्व वायरस को मल्टीप्लाई होने से रोकेगा. लिहाजा, एक कोशिका से दूसरी स्वस्थ कोशिका में वायरस का प्रसार घटेगा.

लोहिया संस्थान के माइक्रोबायोलॉजिस्ट के मुताबिक कोरोना वायरस के ऊपर स्पाइक प्रोटीन का आवरण होता है. यह व्यक्ति के सेल के एसीई-टू रिसेप्टर के संपर्क में आता है. रिसेप्टर के जरिए ही वह सेल के अंदर पहुंचकर उसका आरएनए खुद का विस्तार करता है. पूरे सेल को हाईजेक कर मल्टीप्लाई होने लगता है. इसके बाद वायरस शरीर के दूसरे स्वस्थ सेल, डिफेंस सिस्टम पर हमला करता है. यह एसीई-टू रिसेप्टर रेस्परेटरी व जीआइ ट्रैक में अधिक पाए जाते हैं. इन रिसेप्टर को सेल का मुख्यद्वार कह सकते हैं. यह ब्लॉक हैं, तो वायरस सेल में नहीं पहुंच सकता है.

टीम का कहना है कि सामान्य व्यक्ति भी नीम की पत्ती का पेय पी सकता है. 10-12 ताजी पत्ती लेकर उसे साफ कर लें. इसके बाद दो कप पानी में पत्ती को उबाल लें. आधा-आधा कप पेय का सेवन करें. उसमें हल्का नमक भी डाल सकते हैं. यह पेय डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद हैं. इनमें कोरोना का खतरा भी अधिक रहता है. इसके अलावा यह पेय प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाएगा.

केजीएमयू कुलपित प्रो. एमएलबी भट्ट के अनुसार संस्थान की डॉक्टर ने कोरोना के मरीजों को नीम की पत्ती का पेय देने संबंधी चर्चा की है. उनसे प्रस्ताव मांगा गया है. इसे एथिक्स कमेटी भेजा जाएगा. यहां से अप्रूवल मिलने पर मरीजों को पेय देने का फैसला किया जाएगा.

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