ममता की ढाई घर की चाल

शतरंज के घोड़े की ढाई घर की चाल राजनीति के लिए जमीन तैयार करती है. पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण के दौर में अम्फान की तूफानी आफत के बावजूद सियासत की ढाई घर की चाल बदस्तूर जारी है. इसे लोकतंत्र का बड़ा खूबसूरत लम्हा कहा जाना चाहिए कि किसी मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान को देखने का अनुरोध किया हो और अगले ही दिन प्रधानमंत्री पहुंच गए. लेकिन यह इतना भी सीधा सा मामला नहीं है. तृणमूल कांग्रेस के साथ ही भारतीय जनता पार्टी का निशाना कहीं और है.

| अजय मोहता

गंभीर समचार 04 Jun 2020

शतरंज के घोड़े की ढाई घर की चाल राजनीति के लिए जमीन तैयार करती है. पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण के दौर में अम्फान की तूफानी आफत के बावजूद सियासत की ढाई घर की चाल बदस्तूर जारी है. इसे लोकतंत्र का बड़ा खूबसूरत लम्हा कहा जाना चाहिए कि किसी मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान को देखने का अनुरोध किया हो और अगले ही दिन प्रधानमंत्री पहुंच गए. लेकिन यह इतना भी सीधा सा मामला नहीं है. तृणमूल कांग्रेस के साथ ही भारतीय जनता पार्टी का निशाना कहीं और है.

हालांकि तूफान अम्फान ने प. बंगाल और ओड़िशा में भारी तबाही मचाई. अकेले पं. बंगाल में ही 80 लोगों की मौत हो गई. हजारों की संख्या में कच्चे मकान ध्वस्त हो गए. लाखों लोग बेघर हो गए. 190 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं के कारण बिजली के खंभे और मोबाइल टावर उखड़ गए. जिसके चलते बिजली और फोन सेवा बंद हो गई. जगह-जगह पेड़ गिरने से यातायात ठप हो गया. अम्फान का सबसे ज्यादा कहर पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना, दक्षिणी 24 परगना, मिदनापुर और कोलकाता में रहा. कोलकाता हवाई अड्डे में खड़े 40-40 टन के विमानों को भी तेज हवाओं से भारी नुकसान पहुंचा तो फिर झुग्गी-झोपड़ियों की हालत क्या रही होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से नुकसान को देखने का अनुरोध किया तो कोरोना काल में प्रधानमंत्री मोदी कोलकाता पहुंचे. हर मुश्किल घड़ी में हर भारतवासी के साथ खड़े रहने वाले मोदी 83 दिन बाद प्रधानमंत्री निवास से बाहर निकले और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ तूफान से हुए नुकसान का जायजा लिया.

इसके बाद पीएम ने पश्चिम बंगाल के लिए 1,000 करोड़ रुपये की तात्कालिक मदद का ऐलान किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों को हरसंभव मदद देने के लिए केंद्र और राज्य मिलकर काम कर रहे हैं. प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिजन को 2 लाख और घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी. प्रधानमंत्री ने इस मौके पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रशंसा करते हुए यह भी कहा कि वो कोरोना और अम्फान तूफान के रूप में एक साथ दो अलग-अलग लड़ाइयां लड़ रहीं हैं. इसके बावजूद ममता की राजनीति बाज नहीं आईं. जैसे ही प्रधानमंत्री प. बंगाल से निकलकर अम्फान से प्रभावित ओड़िशा का हाल जानने के लिए रवाना हुए तो ममता ने केंद्र सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा दी. उन्होंने प्रधानमंत्री के दौरे और राहत पैकेज पर अपनी राजनीति शुरू करते हुए आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने 1000 करोड़ रुपये के आपात फंड को जारी करने की घोषणा की है, मगर यह नहीं स्पष्ट किया कि यह अडवांस होगा या राहत पैकेज होगा. ममता ने यह भी कहा कि सब्सिडी, सोशल स्कीम आदि के 53 हजार करोड़ रुपये तो सिर्फ पश्चिम बंगाल के ही केंद्र के ऊपर बकाया हैं. अगर वे हमें कुछ रुपये दे देते हैं तो हम काम शुरू कर सकते हैं. चक्रवात में हमें एक लाख करोड़ का नुकसान हुआ है. एक हजार करोड़ रुपये से कुछ नहीं होने वाला. ममता बनर्जी की यह राजनीति समझ से परे है. वे खुद प्रधानमंत्री को बुलाती हैं, उनका स्वागत करती हैं, उनके साथ विमान में सवार होकर नुकसान का जायजा भी लेती हैं और फिर आरोप लगाने से भी बाज नहीं आतीं. एक तरफ तो वो खुद कह रही है कि अम्फान से प्रदेश में कितना नुकसान हुआ है, इसका आकलन करने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा. दूसरी तरफ कह रही है कि एक हजार करोड़ की मदद नाकाफी है. यह बात सही है कि तूफान से नुकसान ज्यादा हुआ है, लेकिन इसका मतलब यह तो नहीं है कि वो एक ही दिन में पैसे खर्च करके इसे ठीक कर लेंगी. प्रधानमंत्री ने एक हजार करोड़ का ऐलान किया है. केंद्रीय टीम अभी प. बंगाल में ही है. इसकी रिपोर्ट के बाद केंद्र सरकार अगला कदम उठाएगी. प्रधानमंत्री ने भी यह बात कही है. इसके बावजूद इस तरह का आरोप लगाना कहां तक सही है. इनसे साफ है कि ममता आपदा में भी राजनीति करने से बाज नहीं आ रही हैं. होना तो यह चाहिए था कि वो राज्य को फिर से पटरी पर लाने में जुट जातीं, लेकिन हो रहा है बिल्कुल उलट. वो लोगों को राहत पहुंचाने की बजाय अपनी राजनीति चमकाने पर अमादा हैं.