सुदीप की फ़िल्म 'ग्लोरियस डेड' को दो सम्मान

प्रतिष्ठित दसवें दादा साहेब फाल्के फ़िल्म फेस्टिवल (2020) का सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म निर्देशक का सम्मान फ़ीचर फ़िल्म 'ग्लोरियस डेड' के लिए कोलकाता के डॉ.सुदीप रंजन सरकार को दिया गया है. 'ग्लोरियस डेड' की अभिनेत्री नेहा कपूर को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का सम्मान मिला है.

| डॉ अभिज्ञात

गंभीर समचार 16 May 2020

प्रतिष्ठित दसवें दादा साहेब फाल्के फ़िल्म फेस्टिवल (2020) का सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म निर्देशक का सम्मान फ़ीचर फ़िल्म 'ग्लोरियस डेड' के लिए कोलकाता के डॉ.सुदीप रंजन सरकार को दिया गया है. 'ग्लोरियस डेड' की अभिनेत्री नेहा कपूर को बेस्ट सपोर्टिंग एक्ट्रेस का सम्मान मिला है. सम्मान समारोह 30 अप्रैल को नयी दिल्ली में होने वाला था, किन्तु कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन की वजह से समारोह रद्द कर दिया गया. अंततः कुछ दिन बाद अब सम्मान की घोषणा सोशल मीडिया पर लाइव की गयी.

'ग्लोरियस डेड' की शूटिंग आईफ़ोन 8 प्लस के जरिये चार लोकेशंस पर की गयी, जिनमें फ्रांस का ग्रास, कान, वाराणसी और दार्जिलिंग का तिंचुले शामिल है. इस फ़िल्म में अंग्रेज़ी, जर्मन व हिन्दी फ़िल्म जगत के 16 कलाकारों ने अभिनय किया है और इन तीनों भाषाओं का प्रयोग समय, स्थान व परिस्थिति के अनुसार हुआ है. इस फ़िल्म में सत्य, झूठ, भ्रम को अनूठे तरीके से फिल्माया गया है. फ़िल्म में अल्बानिया के अभिनेता सोकोल पेप्लोकाज, जर्मनी की अभिनेत्री गिसेला बर्क व भारत की नेहा कपूर, रश्मि शर्मा, रविशंकर शर्मा आदि शामिल हैं.

उल्लेखनीय है कि अंतरराष्ट्रीय ख्याति के निर्देशक डॉ.सरकार को उनकी सभी फ़िल्मों को कई-कई सम्मान मिल चुके हैं. सुदीप ने अपनी पांचवीं फ़ीचर फ़िल्म 'डेथ ऑफ स्प्रिंग' की शूटिंग हाल ही में फ्रांस में पूरी कर ली है. इस पूरी फ़िल्म को भी उन्होंने आईफ़ोन से शूट किया है. आईफ़ोन उनका पसंदीदा उपकरण रहा है. उनकी निर्माणाधीन छठवीं फ़ीचर फ़िल्म 'नोट्स टू ए लवर' की शूटिंग भी आईफ़ोन से की जा रही है. इन फ़िल्मों का निर्माण नेज़ मूविंग पिक्सल्स की ओर से किया गया है. फ़िल्मों की प्रोड्यूसर रीता झंवर हैं.

सुदीप के निर्देशन में पहली फ़ीचर फ़िल्म 'उंफर्मंग' थी. यह फ़िल्म कर्म और पाप-मुक्ति के इर्द-गिर्द दार्शनिक सवालों पर केन्द्रित है. यह एक बौद्ध भिक्षु की यात्रा थी, जो वेश्यालय में आत्मज्ञान की तलाश करता है. इस फ़िल्म में एक शहर की एक महिला बिल्डर का भी अहम किरदार है, जो हिमालयी मठ से बहुत दूर जीवन का सच जानती है. इस फ़िल्म ने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 19 पुरस्कार जीते थे. यह फ़िल्म 2014 में बनी थी, जो 2016 में राष्ट्रीय स्तर पर रिलीज़ हुई.

उनकी अगली फ़िल्म ‘पैराडिसो’ 2015 में आयी. यह 1960 के दशक के जीवन पर केन्द्रित है. यह एक बंगाली पारिवारिक घराने की कहानी है. फ़िल्म में लोगों की धारणाओं पर एक गहरा व्यंग्य है. मुख्य नायक पूरी फ़िल्म में चुप रहता है और आसपास के लोग उसके बारे में अलग-अलग धारणाएँ बनाते हैं. कुछ उसे पागल कहते हैं तो कुछ संत. वह मानसिक रूप से अपनी खुद की एक समानांतर दुनिया में रहता है, जहां वह एक व्यभिचारी और विध्वंसक व्यक्ति है. इसके बाद 2017 में उनकी फ़िल्म ‘लस्ट’ आयी. यह ब्लैक एंड व्हाइट है. जिसमें मनुष्य की अंधेरी इच्छाओं को दर्शाया गया है. इसके तीन काल खंड हैं, अतीत, वर्तमान और भविष्य. यह रोबोट व आभासी अस्तित्व से संबंधित है. इसमें बोल्ड, कामुक और कलात्मक शॉट्स हैं.

सुदीप निर्देशित ‘डेथ ऑफ स्प्रिंग’ एक अंग्रेजी भाषा की फ़ीचर फिल्म है, जिसके शाट्स फ्रांस में फिल्माए गए हैं. यह एक अलौकिक हॉरर फ़िल्म है. पोस्ट प्रोडक्शन का काम अभी-अभी खत्म हुआ था. फिल्म में कई भारतीय और अल्बानियाई, जर्मन और रूसी कलाकारों ने अभिनय किया है. निर्माणाधीन फ़ीचर फ़िल्म 'नोट्स टू लवर' एक थ्रिलर फ़िल्म होगी. इस थोड़ी बहुत शूटिंग हो चुकी है. सुदीप कवि, चित्रकार, मनोवैज्ञानिक और दार्शनिक हैं, जिसकी छाप उनकी हर फ़िल्म में दिखायी देगी.