बिहार में ‘देहात’ उपलब्ध करा रहा बाजार

किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या है, उत्पादित फसलों का समुचित मूल्य मिलना और व्यापक बाजार तक किसानों की सीधी पहुंच ना हो पाने से इस समस्या का निदान नहीं मिल पा रहा, लेकिन ‘देहात’ ने समस्या को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है...

| संदीप कुमार

गंभीर समचार 04 May 2020

स्टार्टअप को यदि देखना हो तो देहात से सीखे। इनका नाम ‘देहात’ भले ही है , लेकिन देहात में रहने वाले किसानों को इसके माध्यम से शहरी कृषि बाजार में उपलब्ध तमाम चीजें घर बैठे ही मुहैया करा देते है, वो भी इनके द्वारा एक फोन कॉल पर। तभी खुद प्रधानमंत्री भी इनके देहात के कार्य की प्रशंशा आये दिन करते रहते हैं! भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली से पढ़कर निकले शशांक ने खेती को आसान और लाभकारी बनाने के लिए 2011 में देहात की परिकल्पना की। इसमें इनका साथ देने के लिए राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर से पढ़े अमरेन्द्र सिंह जुड़े। देहात का मुख्य उद्देश्य इससे जुड़े किसानों को लाभ प्रति इकाई बढ़ाना है। आज इस ऑनलाइन कृषि बाजार सुविधा से बिहार के छह जिले के 52,000 किसान जुड़े हुए हैं। 2020 तक बिहार के 2.5 लाख किसान को जोड़ने का लक्ष्य रखा है। देहात की जानकारी जब पीएमओ को चली तो बात प्रधानमत्री तक पहुंची। इनकी सोच से प्रभावित हो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जुलाई 2016 में शशांक को अपने साथ केन्या ले गए। वहां उन्होंने देहात की अवधारणा को समझा कर भारतीय प्रतिभा की जोरदार ब्रांडिंग भी की।

देहात की सेवा लेने के लिए इक्छुक किसानों को पहले असान पंजीकरण कराना होता है। पंजीकरण के समय उनके नाम, पता व मोबाइल नंबर दर्ज की जाती है, साथ में कौन सी फसलें उपजाते हैं, जानकारी लेने के साथ उस खेत की मिट्टी की जांच भी करायी जाती है। मिट्टी के अनुरूप खेती के लिए किसानों को फिर प्रेरित किया जाता है। देहात अपने किसानों के उपज को ग्लोबल बाजार भी प्रदान कराता है।

2011 में देहात का पहला केंद्र बिहार के वैशाली जिले में खुला, इन दिनों बिहार, यूपी, झारखंड में 382 केंद्र कार्यन्वित है। वही अप्रैल तक मोतिहारी, कटिहार, भागलपुर में देहात केंद्र खोलने की तैयारी जोरों पर चल रही है। जल्द ही यहां के किसान भी इसका लाभ उठा सकेंगे। शशांक और अमरेन्द्र के बाद देहात के इस मुहीम को आगे बढ़ाने के लिए आईएसएम धनबाद के आदर्श, आईआईटी खड़गपुर के श्याम सुन्दर सिंह और आईआईपीएम के अभिषेक डोकानिया भी योगदान दे रहे हैं। इन दिनों देहात से 82 युवाओं को रोजगार भी मिला है। देहात ने शुरुआती दौर में नाबार्ड से 9.5 लाख के लोन से अपने काम को आगे बढाया। 

शशांक ने बताया की ऐसे युवक जिनके पास इन्टरनेट कनेक्शन, कंप्यूटर या लैपटॉप है मुफ्त में इसकी फ्रेंचाइजी लेकर देहात केंद्र खोल सकते है। कॉल सेण्टर पटना व गुरुग्राम में है। किसान देहात टोल फ्री नंबर 1800.1036110 पर सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक फोन पर परामर्श लेने के साथ साथ बीज खाद कीटनाशक का आर्डर भी दे सकते है। साथ में अपने उपज को बड़े बाजार में बेचने की भी सुविधा है। किसान के बुलावे पर कृषि वैज्ञानिक भी खेत तक जाते हैं और मुफ्त सलाह देते है।

बाक्स मैटर

कोको कोला लीची परियोजना के लिए 1.7 बिलियन डालर का करेगी निवेश

बिहार के कृषि मंत्री  डॉ प्रेम कुमार द्वारा कोको कोला (इण्डिया) कम्पनी, देहात तथा राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर द्वारा पटना में उन्नत लीची कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया। उन्होंने कहा कि कोको कोला (इण्डिया) कम्पनी और बिहार की संस्था देहात तथा राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केन्द्र, मुजफ्फरपुर के साथ मिलकर उन्नत लीची परियोजना प्रारम्भ करने जा रही है। केन्द्र एवं राज्य सरकार बिहार में कृषि के विकास एवं किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कृतसंकल्पित होकर कार्य कर रही है। इसके लिए राज्य में कृषि रोडमैप बनाकर कार्य किया जा रहा है। किसानों को उनके फसल उत्पादों के लिए बेहतर बाजार एवं अधिक-से-अधिक मूल्य दिलाने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किये जा रहे हैं।

बिहार में ऐसे कई विशिष्ट फसल उत्पाद है, जो सिर्फ बिहार में ही बहुतायत मात्रा में पाये जाते हैं, जैसे शाही लीची, जर्दालु आम, मगही पान, कतरनी धान, मखाना आदि। अभी हाल ही में, सरकार के प्रयास से शाही लीची, जर्दालु आम, मगही पान, कतरनी धान को जी॰आई॰ टैग मिला है, जिसके कारण इन फसल उत्पादों को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति मिली है। सरकार का प्रयास है कि इन फसल उत्पादों को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अधिक-से-अधिक मूल्य मिल सके। इसी कड़ी में बहुर्राष्ट्रीय कम्पनी कोको कोला, बिहार के शाही लीची एवं चाइना लीची के क्षेत्र में सहयोग करने जा रही है। बिहार के लीची उत्पादक जिलों मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर एवं वैशाली में लीची के उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीक से लीची उत्पादन करने हेतु किसानों का प्रशिक्षण तथा उनका क्षमतावर्द्धन एवं वैल्यू चैन विकसित करने में सहयोग करेगी।

इसमें लगभग 80 हजार लीची उत्पादक किसानों को प्रशिक्षण दिया जायेगा, 3000 एकड़ क्षेत्र में पुराने लीची बागों का जीर्णोंद्धार किया जायेगा तथा नई तकनीक से लीची के नये बाग लगाये जायेंगे। मुजफ्फरपुर में लीची का एक स्टेट ऑफ द आर्ट बाग लगाया जायेगा, जहाँ आधुनिक तकनीक को प्रत्यक्षण एवं प्रशिक्षण दिया जायेगा। इस कार्यक्रम में कोको कोला (इण्डिया) द्वारा 1.7 बिलियन डॉलर राशि का निवेश किया जायेगा।