निर्भया को मिला इंसाफ़

दिल्ली की सड़कों पर करीब सात साल पहले निर्भया के साथ दरिंदगी करनेवाले चारों दोषियों को फांसी दे दी गई है. तमाम कानूनी अड़चनों के बाद जब फांसी का रास्ता साफ हुआ और दिल्ली की तिहाड़ जेल में 20 मार्च की सुबह 5.3० बजे फांसी दी गई. सूली पर चढ़ाना जेल अधिकारियों के लिए तो आसान था, पर चढ़ना दोषियों के लिए बड़ा मुश्किल. फांसी के तख्त को देखकर ही चारों चिल्ला-चिल्लाकर रोने लगे.

| पीके तिवारी

गंभीर समचार 04 May 2020

दिल्ली की सड़कों पर करीब सात साल पहले निर्भया के साथ दरिंदगी करनेवाले चारों दोषियों को फांसी दे दी गई है. तमाम कानूनी अड़चनों के बाद जब फांसी का रास्ता साफ हुआ और दिल्ली की तिहाड़ जेल में 20 मार्च की सुबह 5.3० बजे फांसी दी गई. सूली पर चढ़ाना जेल अधिकारियों के लिए तो आसान था, पर चढ़ना दोषियों के लिए बड़ा मुश्किल. फांसी के तख्त को देखकर ही चारों चिल्ला-चिल्लाकर रोने लगे. अधिकारियों के पैरों में लिपट गए. दोषियों के मुंह से सिर्फ दो ही शब्द निकल रहे थे. बचा लो-बचा लो, छोड़ दो-छोड़ दो. दोषी विनय बार-बार कह रहा था कि मुझे फांसी मत दो और फांसी से बचने के लिए जमीन पर लेट गया. इसके बाद जेलर के आदेश पर जल्लाद पवन खुद दोषी विनय को घसीटते हुए फांसी के फंदे तक लेकर आया. इसके बाद चारों दोषियों को एक साथ फांसी पर लटकाया गया.

बता दें कि दिल्ली की सड़कों पर सात साल पहले निर्भया के साथ दरिंदगी करनेवाले चारों दोषियों को फांसी दे दी गई है. तिहाड़ के बाहर सुरक्षा कड़ी करते हुए अर्द्धसैनिक बल के जवानों को भी तैनात किया गया. फांसी देने से पहले तिहाड़ जेल के कई अधिकारी फांसी घर के पास पहुंचे, जिनकी निगरानी में फांसी की प्रक्रिया पूरी हुई. फंदे पर लटकाने से पहले जब दोषियों को नहाने और कपड़े बदलने के लिए कहा गया तो दोषी विनय ने कपड़े बदलने से इंकार कर दिया. इसके अलावा उसने रोना शुरू कर दिया और माफी मांगने लगा. दोषियों को फांसी दिए जाने से पहले तिहाड़ जेल के बाहर भीड़ जुटी. दिल्ली के स्थानीय लोग, कुछ एक्टिविस्ट फांसी से पहले जेल के बाहर खड़े रहे और 20 मार्च के इस दिन को निर्भया के लिए सच्ची श्रद्धांजलि वाला बताया. दोषियों के फांसी पर लटकाए जाने के बाद यहां पर कई लोगों ने जश्न भी मनाया और मिठाई भी बांटी. निर्भया के चारों दोषियों विनय, अक्षय, मुकेश और पवन गुप्ता को एक साथ फांसी के फंदे पर लटकाया गया, बाद में पोस्टमार्टम किया गया.

7 साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद निर्भया के माता-पिता अपनी बेटी को इंसाफ दिलाने में कामयाब हुए. फांसी के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि ये लड़ाई सिर्फ निर्भया की नहीं, बल्कि देश की सभी बच्चियों के लिए थी.

कोर्ट द्वारा सभी दोषियों को एक साथ फांसी पर लटकाने का आदेश हुआ था. तिहाड़ जेल नंबर-3 में बने फांसी घर में दो तख्त बनाए गए और दोनों के हैंगर व लीवर अलग-अलग दिशा में थे. दोनों को एक साथ खींचने के लिए दो जल्लाद चाहिए थे लेकिन जल्लाद एक ही था. फांसी तय समय पर देनी थी. इसलिए एक जल्लाद का काम जेलकर्मी ने किया. एक लीवर को जल्लाद पवन ने खींचा और दूसरे का लीवर जेलकर्मी ने. चारों को फांसी पर लटकाने के लिए 60 हजार रुपए का मेहनताना तय हुआ था. जो दोनों में बंटना था. पर जेलकर्मी ने लेने से मना कर दिया, उसके बाद उसके हिस्से का भी पैसा पवन को मिला.

निर्भया बहुत ही जीवट व्यक्तित्व वाली बच्ची थी. इतने दर्द के बाद भी वह जीना चाहती थी. अपनी आंखों के सामने इन दरिंदों को सजा दिलाना चाहती थी. जीने के प्रति उसकी इच्छाशक्ति जबरदस्त थी. वह अपनी पीड़ा के बाद भी मुस्कुरा कर जवाब देती थी, मैं उस बच्ची के जज्बे को सलाम करता हूं. यह कहना है कि निर्भया का इलाज करनेवाले एम्स के पूर्व डायरेक्टर डॉक्टर एमसी मिश्रा का. उन्होंने कहा कि अगर कहीं आत्मा है तो आज उस बच्ची को जरूर सुकून मिल रहा होगा. साल 2012 में जब निर्भया रेप की यह घटना हुई थी, उस समय डॉक्टर मिश्रा एम्स ट्रॉमा सेंटर के प्रमुख हुआ करते थे. निर्भया का इलाज सफदरजंग अस्पताल में चल रहा था, लेकिन ट्रॉमा केयर के एक्सपर्ट होने के नाते डॉक्टर मिश्रा को निर्भया के इलाज में स्पेशल तैनाती की गई थी.

 निर्भया के चार दोषियों (पवन, विनय, मुकेश, अक्षय) को उनके किए की सजा मिल गई. लेकिन क्या आपको याद है इस केस में दो दोषी और थे, एक राम सिंह, जिसकी जेल में ही मौत हो गई. दूसरा वह जिसे सबसे ज्यादा दरिंदगी करने के बावजूद छोड़ना पड़ा, क्योंकि वह उस वक्त नाबालिग था. निर्भया का यह दोषी कैसा दिखता है? यह कोई नहीं जानता. यह इकलौता था जिसकी कोई तस्वीर सामने नहीं आई. निर्भया के नाबालिग दोषी को पुलिस प्रशासन ने नया नाम देकर साउथ इंडिया भेज दिया था. अब वह वहां कुक का काम करता था. खाना बनाने की कला उसने जुवेनाइल जेल में रहने के दौरान ही सीखी थी. पुलिस अधिकारी ने उस वक्त इस बारे में बताया था कि नाबालिग दोषी को दिल्ली से बहुत दूर भेज दिया गया है. वारदात के वक्त नाबालिग होने के कारण उसे जुवेनाइल कोर्ट से 3 साल की ही सजा हुई थी. फिलहाल वो आजाद है. लेकिन अब कहां है यह साफ नहीं है?

 

ट्रेंडिंग