कीर्ति बने कीर्तिवान

खून के रिश्ते से भी बढ़कर होता है इंसानियत का रिश्ता, इसी जिंदादिली की मिसाल को पेश कर रहे है प्रदेश के दुर्ग जिला के मिनाक्षी नगर ,बोरसी निवासी कीर्ति कुमार परमार. कम उम्र व युवा जोश से भरे कीर्ति ने हज़ारों लोगों की जान बचा कर फरिश्ता बन गए है.

| प्रज्ञा प्रतीक्षा तिवारी

गंभीर समचार 04 May 2020

खून के रिश्ते से भी बढ़कर होता है इंसानियत का रिश्ता, इसी जिंदादिली की मिसाल को पेश कर रहे है प्रदेश के दुर्ग जिला के मिनाक्षी नगर ,बोरसी निवासी कीर्ति कुमार परमार. कम उम्र व युवा जोश से भरे कीर्ति ने हज़ारों लोगों की जान बचा कर फरिश्ता बन गए है. इतना ही नहीं माता-पिता का साया कम उम्र में उठने के बाद वे अपने दादा-दादी और भाई -बहन के लिए एडवर्टाइसिंग का छोटा सा काम करते हैं और इससे ही अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं. वही कीर्ति कुमार पिछले साढ़े पांच साल से छत्तीसगढ़ ब्लड डोनर फाउंडेशन के फाउंडर भी और वे इसके जरिये दुर्ग, भिलाई और रायपुर में ब्लड डोनर उपलब्ध कराते है. इतना ही नहीं उनका खुद का ब्लड ग्रुप ओ नेगेटिव है जो काफी रेयर ब्लड ग्रुप में से एक है फिर भी उन्होंने अब तक 42 बार ब्लड डोनेट किया है और तो और एसडीपी और प्लेटलेट के लिए भी कई बार खून देकर मरीजों की जान बचायी हैं. इसके साथ ही कीर्ति कुमार के नेटवर्क में 5000 से अधिक ब्लड डोनर उनके नेटवर्क में है जो उनके साथ मिलकर मरीजों को नि:शुल्क में खून डोनेट करते है. वही उनकी समाज के प्रति इस नजरिये के लिए उन्हें पुलिस विभाग और राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान से नवाज़ा भी गया है.  जनता से रिश्ता टीम से कीर्ति कुमार रूबरू हुए और उन्होंने अपने इस छत्तीसगढ़ ब्लड डोनर फाउंडेशन की नींव की शुरुआत कैसे किया और आज युवा कैसे उनसे जुड़ रहे इस बारे में उन्होंने बताया .

अक्सर अस्पतालों में ब्लड की कमी से कई बार मरीज को बचाना मुश्किल हो जाता है. इतना ही नहीं कई बार मरीज के परिजनों को ब्लड से ज्यादा ब्लड डोनर की जरुरत होती है, ऐसे में सही ब्लड ग्रुप मैच नहीं होता या रेयर ब्लड ग्रुप डोनर नहीं मिलने से मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में जो खून देने के लिए तैयार हो जाये वो किसी फ़रिश्ते से कम नहीं होता. ठीक उसी तरह कीर्ति कुमार जब 20 साल के थे. वे देखते थे उन लोगों को जो अपने जीवन में सफल है वे खून दे रहे है. तब उनके मन में ख्याल आया और तब से वे भी अपने जन्मदिन से लेकर जरुरत पडऩे पर ब्लड डोनेट करवाते हैं. उन्होंने बताया उनके माता- पिता नहीं है, पर कभी घर में ऐसी कोई पारिवारिक स्थिति को देखकर नहीं बल्कि लोगों को देख कर ख्याल आया. वही उनके भाई -बहन भी उनके साथ सनेक काम में साथ देते हैं और वे भी कई बार ब्लड डोनेट करते हैं.

अक्सर जिस सोशल मीडिया की हम आलोचना करते है कई बार वह सोशल मिडिया आज कितने काम का साबित हो रहा है, इसका कीर्ति कुमार को बखूबी इल्म है. उन्होंने बताया शुरुआत में उनके पास वैसे लोगों के कॉल आते थे जिन्हें ब्लड की जरुरत होती थी या फिर अन्य ब्लड ग्रुप अरेंज करने के लिए भी लोग कॉल करते थे. तब वे अपने कांटेक्ट में संपर्क करते और मदद करते. सोशल मीडिया ने उनके इस काम में बहुत मददगार साबित हुआ. इसके माध्यम से वे दुर्ग, भिलाई और रायपुर के किसी भी अस्पताल में तुरंत डोनर उपलब्ध करवा देते हैं. इसके साथ ही समय समय पर ब्लड कैम्प लगाते हैं.
कीर्ति कुमार और उनकी टीम ने रायपुर के सबसे बड़े अस्पताल डॉ भीमराव आंबेडकर अस्पताल में बॉम्बे ब्लड ग्रुप की जरुरत पडऩे पर पहली बार वहां किसी ने तुरंत और नि:शुल्क में डोनेट कराया था.  दरअसल, मेकाहारा में जशपुर के पत्थलगांव जैसे दूरस्थ अंचल से एक नन्ही बच्ची का इलाज चल रहा था जिसका बॉम्बे ब्लड ग्रुप था. यह ब्लड ग्रुप 10 लाख में दो से तीन व्यक्तियों का ही रहता है और तुरंत में उपलब्ध करना मुश्किल रहता है. इतना ही नहीं इस ब्लड ग्रुप का मिलना भी काफी कठिन होता है. वही छत्तीसगढ़ ब्लड डोनर के कीर्ति ने बताया उनकी टीम ही पहली ऐसी संस्था थी जिसने नि:शुल्क में इस ग्रुप का ब्लड डोनेट कराया था और उस बच्ची की जान बचायी थी. इसके साथ ही मेकाहारा अस्पताल में पहली दफा किसी संस्था द्वारा इस ग्रुप का डोनेट कराया गया था.

शहर के अन्य संस्था भी उपलब्ध करते है ब्लड डोनर
कीर्ति कुमार ने बताया ब्लड डोनर के साथ उनके पास कई संस्था के कॉन्टेक्ट है जो कई बार एक दूसरे से संपर्क कर मरीजों की जान बचाने के लिए डोनर ढूंढते है. वही रायपुर शहर में भी ऐसी संस्था है जो ब्लड डोनर उपलब्ध कराते है जिसमे मुख्य रूप से ओम साई रक्तदाता सेवार्थ समिति ,शदाणी मेडिकल हेल्प टीम , ब्लड डोनेशन क्लब , सिटी ब्लड बैंक जैसे तमाम संस्था है जो  नि:शुल्क में ब्लड डोनर उपलब्ध करा असाहय की मदद करती है.   

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