सोशल मीडियाः सिर्फ नंबर गेम नहीं

मीडिया , , बुधवार , 16-08-2017


Social Media Not Just Numbers Game

रेशू वर्मा

आज की दुनिया नंबर के खेल पर टिकी है, जितना बड़ा नंबर उतनी ज्यादा ताकत. वास्तविक दुनिया के साथ-साथ अगर आभासी दुनिया की बात करें तो यहाँ का सारा गणित ही नंबर पर टिका है. यह सोशल मीडिया की दुनिया में तो भारत को अमेरिका से भी ऊपर खड़ा करता है. हाल ही में फेसबुक द्वारा जारी किए गए आंकड़े बताते हैं कि जुलाई 2017 में फेसबुक के भारत में 24.10 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता थे जबकि अमेरिका में इनकी संख्या 24.00 करोड़ थी.

सक्रिय उपयोगकर्ता की संख्या में भारत भले ही आगे निकल गया हो, लेकिन इन आंकड़ों की गहराई में जाने पर यह बात साफ़ हो जाती है कि यह नंबर जितना बड़ा नजर आ रहा है वास्तविकता में यह उतना बड़ा है नहीं. दरअसल फेसबुक या सोशल मीडिया की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी पहुँच कितने लोगों तक है. अमेरिका के फेसबुक सक्रिय उपयोगकर्ता वहां की 73% आबादी तक पहुँचते हैं जबकि भारत में इनकी पहुँच 20% लोगों तक भी नहीं है. यानी भारत में फेसबुक को अभी लम्बी यात्रा तय करनी है।

फेसबुक आज के समय में संवाद का एक सशक्त माध्यम है, यह विज्ञापनों से लेकर समाचार वितरण तक का मुख्य माध्यम बन चुका है. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि इसकी पहुँच देश के सभी वर्गों और भागों तक हो ताकि इसका भरपूर लाभ उठाया जा सके. सरकार भी सोशल मीडिया के द्वारा जनता और सरकार को सीधे तौर पर जोड़ने में प्रयत्नशील है. इस दिशा में ‘डिजिटल इंडिया’ एक बड़ी मुहिम है. लेकिन इन सभी कोशिशों के वो परिणाम आते नहीं दिख रहे हैं जिनकी उम्मीद की जा रही है.

भारत के कुल फेसबुक यूजर्स में तीन चौथाई भाग पुरुषों का है, यानी महिलाएं इस मामले में पीछे छूट रही है। इसकी एक वजह तो यह है कि डिजिटल साक्षरता बहुत व्यापक तौर पर महिलाओं तक नहीं पहुंची है. हम कितना भी डिजिटल इंडिया और देश की व्यवस्था को इन्टरनेट से जोड़ने की बात कर लें, लेकिन सच तो यह है कि देश के दूर-दराज के इलाकों की बात तो अलग है, दिल्ली में भी हर भाग में अच्छी इन्टरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है. बनारस तो अभी भी 2जी, 4जी सुविधाओं के बीच में ही झूल रहा है. ग्रामीण अंचल के पास पहुँचते ही इन्टरनेट साथ छोड़ जाता है. अगर सही मायनों में देश को इन्टरनेट से जोड़ना है तो सबसे पहले सभी भागों में अच्छा और सस्ता इन्टरनेट उपलब्ध करना होगा. 

सस्ते और अच्छे इन्टरनेट के बाद जो दूसरी सबसे महत्वपूर्ण बात है वो है सस्ते स्मार्ट मोबाइल हैण्डसेट की. अगर विश्व स्तर की बात की जाए तो 55% से ज्यादा लोग मोबाइल के द्वारा इन्टरनेट का इस्तेमाल करते हैं. ब्रिटेन और अमेरिका में 10 में से 8 लोग इन्टरनेट के लिए मोबाइल हैंडसेट का उपयोग करते हैं. जी20 देश समूह के मध्य हुई रिसर्च के अनुसार भारत में 79% लोग इन्टरनेट के इस्तेमाल के लिए मोबाइल हैण्डसेट का उपयोग करते हैं. 

हिंदी भाषा का महत्व लगातार बढ़ रहा है. केपीएमजी-गूगल की रिपोर्ट के अनुसार 2016 में भारतीय भाषाओं का इस्तेमाल करने वालों की संख्या 23.40 करोड़ थी जबकि अंग्रेजी के इस्तेमाल करने वाले 17.50 करोड़ थे. हिंदी के मामले में यह संख्या वर्ष 2021 तक 53.60 करोड़ होने की उम्मीद ही जबकि अंग्रेजी के यूजर्स बमुश्किल 20.00 करोड़ पहुँचेंगी. इसका मतलब है कि इन्टरनेट का भविष्य हिंदी और अन्य स्थानीय भाषायें हैं. इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि सोशल मीडिया पर ज्यादा से ज्यादा सामग्री हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में उपलब्ध करायी जाए जिससे लोग इसका पूरा उपयोग कर सकें. भविष्य भारत और भारतीय भाषाओं का है और विश्व पटल पर ना सिर्फ अपनी संख्या से बल्कि अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराने के लिए यह आवश्यक है कि उसके बारे में लोगों को पूरी जानकारी उनकी अपनी भाषा में दी जाए. 

(लेखिका संचार तकनीक मामलों की जानकार हैं.)


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