मौत का कुआं

मीडिया , , सोमवार , 02-10-2017


 wellof Death

रेशू वर्मा

गूगल पर पहले ‘ब्लू व्हेल’ टाइप करने पर दुनिया के सबसे बड़े स्तनपायी से संबंधित जानकारी मिलती थी. लेकिन आज ऐसा करने पर गूगल एक खतरनाक ऑनलाइन गेम के बारे में बताता है और इसके बारे में ढेर सारी जानकारियाँ उपल्बध करा देता है. ऑनलाइन गेम ब्लू व्हेल, जिसका टारगेट मुख्य रूप से बच्चे हैं, मात्र खेल नहीं वरन खेलने वाले को आत्महत्या के लिए उकसाने का माध्यम है. इस खेल के कारण लगभग 150 मासूम अपनी जान ले चुके हैं. ब्लू व्हेल किसी एप्लीकेशन के माध्यम से सीधे डाउनलोड नहीं होता है. इसके लिए इन्टरनेट पर लिंक मिलता है, यह लिंक व्हाटसएप्प या अन्य माध्यम से प्राप्त होता है और एक बार डाउनलोड करने के बाद शुरू होता है 50 दिनों की मियाद वाला मौत का खेल. 

ब्लू व्हेल रूस की www.vk.com नामक सोशल साईट पर सबसे पहले देखा गया, लेकिन अब विश्व के लगभग सभी भागों से इस खेल से जुड़ी खबरें आ रही हैं. इस खेल के 50 टास्क ज्यादातर देर रात या सुबह-सुबह शुरू होते हैं. डाउनलोड करने के बाद पहला मैसेज सुबह 4:20 पर आता है जिसमें अपने दोस्त को नफरत जताने से लेकर आधी रात को डरावनी फिल्म देखना, स्टेटस अपडेट करके दुनिया को ये बताना कि ‘मैं ब्लू व्हेल हूँ’, इत्यादि हैं. बतौर प्रमाण टास्क पूरा होने के फोटो भी गेम के एडमिन को भेजना होता है. यह खेल बच्चे के दिमाग को इस कदर प्रभावित करता है कि अव्वल तो वह इससे निकलता ही नहीं है और अगर ऐसा करना भी चाहे तो भी उसको चेताया जाता है कि उसका ऐसा करना उसके एवं उसके परिवार के लिए नुकसानदायक होगा. नतीजतन बच्चा इस खेल में फंस कर रह जाता है.

हालांकि व्लू व्हेल को बनाने वाला पुलिस द्वारा पकड़ा जा चुका है और उस पर कानूनी कार्यवाही भी चल रही है. लेकिन इस खेल का हमारे बीच आकर अपनी जगह बना लेना कहीं ना कहीं हमारी पारिवारिक एवं सामाजिक व्यवस्था पर सवाल भी खड़ा करता है. दरअसल इस खेल से जुड़ने वाले ज्यादातर बच्चे हाई-प्रोफाइल परिवारों से आते हैं जहाँ सुविधाओं एवं संसाधनों की कमी नहीं होती है. बावजूद इसके बच्चा इस 50 की मियाद के ख़तरनाक खेल में मशगूल होकर समाज से अलग हो जाए, अपने शरीर को नुकसान पहुँचाता रहे, अजीब से काम करता रहे और इस तमाम से पूरा परिवार बेख़बर रहे – हक़ीक़तन यह दुखद एवं भयावह स्थिति है. 

आज की इन्टरनेट से नियंत्रित होती आभासी दुनिया में माँ-बाप का यह कर्तव्य तो बनता ही है कि वे न सिर्फ़ अपने बच्चों के मित्र बनें बल्कि उनकी रोज़ की गतिविधियों पर भी ध्यान रखें. यह ध्यान तब और भी जरूरी हो जाता है जब बच्चे की हरकत में अचानक से कोई परिवर्तन आता है या वह सबसे अलग-थलग रहने लगता है. ऐसे में बच्चे के व्यवहार में इन परिवर्तनों का कारण जानने की कोशिश करनी चाहिए क्योंकि हो सकता है कि वह ब्लू व्हेल या ऐसे ही किसी अन्य दुश्चक्र में फंसा हुआ हो. सिर्फ शारीरिक और मानसिक गतिविधियों पर ही नहीं बल्कि उनके इन्टरनेट सर्च पर भी घरवालों की निगाह होनी चाहिए.

आज के इन्टरनेट जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है. बच्चे को इससे अछूता तो नहीं रखा जा सकता, लेकिन इस पर नजर तो रखी ही जा सकती है कि वह इसका इस्तेमाल किस प्रकार कर रहा है. कोशिश तो ये होनी चाहिए कि बच्चे के लिए इन्टरनेट की व्यवस्था घर में ऐसी जगह पर हो जहाँ वह अपना काम भी कर सके और अभिभावक उन पर नजर भी रख सके. वैसे बच्चे पर सिर्फ नजर रखना ही काफी नहीं है. उसके साथ संवाद भी इस तरह कायम रहना चाहिए जिससे वह अपनी सारी बातें आपके साथ शेयर कर सके और ब्लू व्हेल उसके लिए विश्व का सबसे बड़ा स्तनपायी ही रहे. महंगे मोबाइल दे देना बच्चों को मां-बाप की आर्थिक सफलता का प्रमाणपत्र है. लेकिन मोबाइल से भी ज्यादा कीमती है वक्त, जो बच्चे को देना होगा. बच्चा क्या कर रहा है, यह बात आम तौर पर कई अभिभावकों को नहीं पता होती. लैपटाप पर लगा हुआ बच्चा कई बार अभिभावकों को भरमा देता है कि वह कोई गंभीर काम कर रहा है. मोबाइल में डूबा बच्चा कई बार अभिभावकों को कह देता है कि यू-ट्यूब पर गाना सुन रहा है या कोई फिल्म देख रहा है. पर वह ऐसा ही कर रहा है या नहीं इस पर अभिभावकों को नजर रखना जरूरी है क्योंकि अब बात सिर्फ बुरी आदत की नहीं वरन जीने-मरने के प्रश्न खड़ा करने लगी है. 

सनद रहे अब इंटरनेट पूरी दुनिया को घर में लाकर रख दिया है. यह दुनिया ठीक वैसी ही है, जैसी वास्तविक दुनिया. दुष्ट, बदमाश, कातिल सब हैं इंटरनेट की दुनिया में भी. वह आपकी इजाजत के बगैर ही सीधे बच्चे से संवाद कर रहे हैं. ऐसे में यह समय अधिक सावधानी बरतने का समय है.


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