देश की सबसे ताक़तवर जांच एजेंसी

व्यंग्य , , बृहस्पतिवार , 29-03-2018


The countrys most powerful investigating agency

त्रिभुवन

वह एक प्राचीन देश था और विचित्र देश था. यह उन दिनों की बात है, जब देश में लोकतंत्र नहीं आया था.

देश की सबसे ताक़तवर जांच एजेंसी का सबसे ताक़तवर अधिकारी देश के सबसे ताक़तवर नेता के दफ़्तर में सावधान की मुद्रा में खड़ा था. 

उसे आदेश हुआ कि वह देश के रक्षा उपकरणों संबंधी एक सौदे के भ्रष्टाचार के उस मामले को सदा के लिए ख़त्म करवाकर क्लीन चिट दिलाने लायक ही तथ्य प्रस्तुत करे. वह उस कक्ष के लाल कालीन की धूल में लिपटता हुआ वह देश के सबसे ताक़तवर शासक के सबसे साफ़ जूते के तले से बेहद परिश्रम से कुछ धूल कण तलाशकर अपने मस्तक पर लगाते हुए आदेश लेकर प्रसन्न भाव से बाहर निकल गया.

वह क्लीनचिट के साथ लौटा ही था कि देश के लोगों ने भ्रष्टाचारियों की सत्ता बदल दी. अब सत्ता का केंद्रीय कक्ष सुशासन की अति मधुर सीत्कारों की अनुगूंज से भर गया था. मानो वह किसी मधुयामिनीरत किसी प्रणयी युगल का शयनकक्ष हो.

देश की उसी सबसे ताक़तवर जांच एजेंसी का वही सबसे ताक़तवर अधिकारी देश के नए और सबसे ताक़तवर नेता के दफ़्तर में सावधान की मुद्रा में फिर खड़ा था.

उसे आदेश हुआ कि वह पिछली सत्ता नई सत्तारूढ़ पार्टी के जिस नेता को जेल भेजने के लिए तैयार थी, उसके मामले में वह किसी भी तरह किसी को मैनेज करे और जिस तरह पिछली सरकार के सबसे ताक़तवर नेता को क्लीन चिट मिली थी, उसी तरह इसे भी क्लीन चिट मिले. और क्लीन चिट मिल जाए तो आगे अपील न की जाए.

जांच एजेंसी के सबसे ताक़तवर अधिकारी ने देश की सबसे कमनीय जिम्नास्ट से भी अपनी सबसे कमनीय कमर झुकाई और साहब के स्फटिक से भी स्वच्छ खड़ाऊ को छूने लगा तो वे अदृश्य हो गए. वह चौंक गया. उसने देश के सबसे ताक़तवर पुरुष के मुस्कुराते चेहरे के सामने अपना याचनाकुल चेहरा प्रस्तुत किया और पांव के कुछ धूलकणों की मांग की.

देश के सबसे ताक़तवर शासक ने देश के सबसे लचीली और मेरुरज्जू से मुक्त देह वाले सबसे ताक़तवर जांच अधिकारी से कहा : वे कभी ज़मीन पर नहीं चले. ज़मीन पर चलने वाले उन्हें पसंद नहीं. लेकिन वे चीन की धरती पर एक बार चले थे तो वहां से धूल के कुछ कण आयात किए जा सकते हैं. जांच एजेंसी ने एक अंतरराष्ट्रीय निविदा जारी की और धूल के कारण आयात करके मस्तक से लगाए.

जांच एजेंसी के सबसे ताक़तवर अधिकारी को अब नया जांच आदेश मिला, जिसमें लिखा था कि वह पिछले शासन की सब क्लीन चिटों पर फिर से नए आदेश लेकर आए और जेलों के प्रवेश द्वारों पर भीतर जाने की प्रतीक्षा कर रहे समस्त अपराधियों के लिए नई क्लीन चिटें लेकर आए.

चारों तरफ एक समवेत स्वर गूंजा : जी, सर! मेरे आक़ा!! मेरे हुज़ूर!!! 

वह चला गया, लेकिन आयातित धूलकणों ने प्रसन्न मुद्रा में अपने देश के धूल कणों को संदेश भेजा : इस देश की न्यायवीथियों में झूठ और कायरता का कितना सहज सुशासन है. प्रतीक्षा किस बात की है!!!                                                          वाल से साभार


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