भारत-इसराइल के आपसी हित

संपादकीय , , बृहस्पतिवार , 01-02-2018


Indo Israel mutual interest

अजय कुमार मोहता

हाल ही में इसराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू भारत के छह दिवसीय दौरे पर आये थे और भारत-इसराइल के बीच नौ बड़े समझौते हुए, जो कि पूर्व अपेक्षित था. इस तरह देखा जाए तो भारत और इसराइल के बीच तेज़ी से बढ़ रहे सामरिक संबंधों पर बात करना अब टैबू नहीं रहा. दोनों देशों में दक्षिणपंथी पार्टियों, यहां भारतीय जनता पार्टी और इसराइल में लिकुड की सरकारें हैं. दोनों में विचारधारा के स्तर पर कई समानताएं हैं. इसने दोनों देशों के आपसी संबंधों को विस्तार दिया है.

भारत में वर्ष 2014 के आम चुनाव के परिणाम आने से पहले ही अनुमान लगाया जा रहा था कि दोनों देशों के बीच रक्षा सौदे, ख़ासकर सैन्य कारोबार को बढ़ावा मिलेगा, जिस तरह के सैन्य समझौते हुए हैं, वह इसकी पुष्टि भी करते हैं.

पहले की तरह, अब दोनों देशों के नेता मौजूदा रिश्तों की मज़बूती के बारे में बात करने में झेंपते नहीं हैं. भारत में इसराइली राजदूत डेनियल कारमोन ने पिछले साल मार्च में दोनों देशों के बीच बढ़ते हुए सैन्य समझौते के बारे में कहा था, ''हमें ना तो संकोच है और ना ही हम शर्मिंदा हैं.'' 1990 के मध्य से ही भारत और इसराइल के बीच सैन्य संबंध सबसे अहम रहे हैं. बीते एक दशक के दौरान दोनों देशों के बीच क़रीब 670 अरब रुपए का कारोबार हुआ है. मौजूदा समय में, भारत सालाना क़रीब 67 अरब से 100 अरब रुपए के सैन्य उत्पाद इसराइल से आयात कर रहा है. ये आंकड़े तब और महत्वपूर्ण लगने लगते हैं जब उस तथ्य की ओर ध्यान जाता है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों की शुरुआत जनवरी, 1992 में हुई थी. दोनों देशों के बीच रिश्ते को मज़बूती देने में इसराइल की हथियार बेचने की मंशा भी रही है.

इसमें 1999 के करगिल युद्ध के दौरान इस्तेमाल किए गए लेज़र गाइडेड बम और मानवरहित हवाई वाहन शामिल रहे हैं. संकट के समय भारत के अनुरोध पर इसराइल की त्वरित प्रतिक्रिया ने उसे भारत के लिए भरोसेमंद हथियार आपूर्ति करने वाले देश के तौर पर स्थापित किया और इससे दोनों देशों के रिश्ते काफ़ी मज़बूत हुए हैं.

भारत के रक्षा बाज़ार की अहमियत उस सौदे से भी ज़ाहिर होती है, जब इसराइल ने भारत को मई, 2009 और मार्च, 2010 में 73.7 अरब रुपए में रूस निर्मित इल्यूशिन द्वितीय-76 से लैस फ़ाल्कन एयरबोर्न वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (अवाक्स) बेचा था.

भारतीय वायुसेना के पास तीन ऑपरेशनल अवाक्स मौजूद हैं, इसके अलावा दो अन्य के जल्दी ही वायुसेना में शामिल होने की उम्मीद है. अमरीकी दबाव में यह तकनीक इसराइल ने चीन को नहीं दी है.

बीते दो सालों के दौरान, दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण सैन्य समझौता हुए हैं. मोदी सरकार के सत्ता में आने के कुछ ही महीनों बाद सितंबर, 2014 में भारत ने इसराइली एयरोस्पेस इंडस्ट्री की बराक- एक एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम ख़रीदने की घोषणा की थी, यह सबसे महत्वपूर्ण समझौतों में एक है.

भारतीय सेना के आधुनिकीकरण की सुस्त रफ़्तार को देखते हुए इसराइल भारत का सबसे महत्वपूर्ण मददगार साबित हो सकता है. ऐसे में भारत और इसराइल के सैन्य कारोबार में तकनीक हस्तांतरण सबसे अहम पहलू है, इसका ज़िक्र भारतीय प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं. इससे ज़ाहिर है कि दोनों देशों के बीच आपसी रिश्ते रक्षात्मक सौदे और राष्ट्रीय सुरक्षा की सामरिक चुनौतियों पर निर्भर होंगे. 


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