छवि गढ़ने की कवायद!

संपादकीय , , मंगलवार , 31-10-2017


Image painting exercises

अजय कुमार मोहता

कहा जाता है कि हवा का रुख देख कर जो अपनी रणनीति बनाता है, वहीं सफल होता है. हवा का रुख भांपने में नरेंद्र मोदी अव्वल रहे हैं, यह साबित हो चुका है. गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए ही उन्होंने अपनी छवि गढ़ने की शुरुआत कर दी थी, इसका ट्रायल भी गुजरात विधानसभा चुनावों में उन्होंने किया था, जो सफल रहा. उसी अनुभव को उन्होंने 2014 के लोकसभा चुनाव में योजनाबद्ध तरीके से क्रियान्वित किया. वास्तव में आज की युवा पीढ़ी आंदोलनों, रैलियों, जनसभाओं में केवल और केवल मनोरंजन के लिए पहुंचती है, उसके विचारों को कैसे अपने पक्ष में मोड़ा जाए इसके लिए सशक्त योजना और टूल की जरुरत थी, जिसे मोदी ने समय रहते पहचान लिया और टूल के रूप में तकनीक को अपनाया. सोशल मीडिया से लेकर इंटरनेट की अन्य तकनीक का जम कर उन्होंने उपयोग किया. जहां सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने अपने विचारों से लोगों को प्रभावित किया वही तकनीक के नायाब तरीको से अपने प्रति आकर्षण. नतीजा 2014 के चुनाव में जीत रही.

अब विपक्ष, खास कर कांग्रेस 2014 में करारी हार के बाद से समझ गई कि सत्ता में रहने के लिए जरूरी है हवा के रुख के साथ होना. यही वजह है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने 2019 चुनाव की तैयारी जोरशोर से शुरू कर दी है. रिपोर्टस के मुताबिक, लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस एक अमेरिकी फर्म, कैंब्रिज ऐनालिटिका की सेवाएं ले रही है. इससे पहले 2016 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शानदार जीत में इस कंपनी ने अहम भूमिका निभाई थी. यह कंपनी डाटा विश्लेषण में निपुण है. ये पता लगाने का काम करती हैं कि लोगों की क्या पसंद और नापसंद है, साथ ही लोगों के मुद्दे क्या हैं? इसकी मदद से नेता अपनी रणनीति तैयार कर 

सकतें है. कहते है कि कैंब्रिज ऐनालिटिका के सीईओ एलेक्जेंडर निक्स इस संदर्भ में राहुल गांधी से मुलाकात कर चुके हैं और 2019 के चुनाव के लिए अपनी रणनीति भी बता चुके हैं. निक्स ने राहुल को यह भी बताया कि किस तरह से मतदाताओं को ऑनलाइन रिझाया जा सकता है. माना जा रहा है कि 2019 के आम चुनाव से पहले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में इसे आजमाया जा सकता है.

2014 के लोकसभा चुनावों पर अगर नजर दौड़ाई जाए तो पता चलेगा कि भाजपा ने उस समय सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल कर अपनी रणनीति तैयार की थी. भाजपा और खुद  मोदी भी सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय हैं. सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर मोदी ने लोगों को बताया था कि वह तकनीकि प्रेमी और प्रगतिशील है. 

हालांकि कांग्रेस के पास फिलहाल ऐसा कोई बड़ा मुद्दा नहीं दिखता है, जिस पर वह अभी से धार दे कर लोकसभा चुनाव तक उसे नुकीला बना सकें. इसलिए वह सरकार के खिलाफ उपजे आक्रोश को ही अपना हथियार बनायेगी. गुजरात विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हैसटैग ‘विकास पागल हो गया है’ अभियान चला रही है. देखना होगा कि यह अभियान क्या गुल खिलाता है और राहुल की कैसी छवि गढ़ता है. अब नेताओं को अपनी छवि सीधे लोगों से संवाद कर बनाने के बजाय आनलाइन माध्यम मुफिद लगता है. 

2019 का आम चुनाव किसकी कैसी छवि पेश करता है, इसका इंतजार करना होगा. 


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