सेवा क्षेत्रः स्वास्थ्य और यातायात को नई उम्मीदें

आवरण कथा , , बृहस्पतिवार , 29-03-2018


Service Sector Health and Traffic New Expectations

श्रीकांत अस्थाना

चुनावी साल 2019 से पहले के अंतिम बजट में मोदी सरकार के वित्तमंत्री अरुण जेटली ने जो प्रस्ताव किए हैं वे अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों पर कोई मौलिक प्रभाव कम ही डालने वाले लगते हैं. ज्यादातर घोषणाएं और प्रावधान मतदाताओं के बड़े वर्ग को यह दिखाने के लिए की गई लगती हैं कि सरकार उन्हें लेकर चिंतित है. 

जहां तक इस बजट में सेवा क्षेत्र के लिए किए गए प्रावधानों का मसला है तो यहां कुछ ऐसी बातें की गई हैं जिससे सेवा क्षेत्र के कुछ हिस्सों को भारी बेहतरी की उम्मीद जागी है. ये क्षेत्र हैं स्वास्थ्य सेवाएं और स्वास्थ्य तथा सामान्य बीमा. इनके अलावा, स्वास्थ्य से ही जुड़े हुए क्षेत्र फार्मास्यूटिकल्स को भी सरकार की घोषणाओं से बेहतरी की उम्मीदें जागी हैं. सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति की घोषणा करते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 1200 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की घोषणा की है. इसमें 10 करोड़ गरीब परिवारों को पांच लाख रुपये वार्षिक सीमा तक द्वितीयक तथा तृतीयक स्तर की स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अस्पताल में भर्ती होतक इलाज की सुविधा देने की बात कही गई है. 

सरकार ने इसे लागू करने के तंत्र के बारे में कोई अलग बात नहीं की है तो माना जा सकता है कि स्वास्थ्य बीमा के मौजूदा तंत्र के सहारे ही सरकार अपनी योजना को अमली जामा पहनाने के बारे में सोच रही है. ऐसे में स्वास्थ्य बीमा के क्षेत्र में सक्रिय सामान्य बीमा कम्पनियों के अलावा विशेष स्वास्थ्य बीमा योजनाएं बेच रही जीवन बीमा कम्पनियों के पास भी इस बात के अवसर होंगे कि वे सरकार की योजना को लागू करने की दिशा में उसके साथ तालमेल की पहल करते हुए इस धन में हिस्सेदारी हासिल करें.

 जहां तक स्वास्थ्य सेवाओं की बात है तो सरकार के प्रस्ताव में इस पर बुनियादी असर डालने वाली कोई बड़ी बात नहीं है. घोषणा के मुताबिक देश भर में लगभग डेढ़ लाख स्वास्थ्य उपकेंद्रों को स्वास्थ्य लाभ केंद्रों (हेल्थ वेलनेस सेंटर) में बदला जाएगा. यह परिवर्तन वास्तव में किस हद तक हो सकेगा और सुविधाओं में क्या बढ़ाया जा सकेगा, यह देखने वाली बात है. इनसे अलग, उच्चतर स्वास्थ्य सेवाओं के ढांचे के विकास के लिए कोई प्रावधान नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य बीमा के रास्ते धन की उपलब्धता निजी क्षेत्र को ज्यादा और बेहतर सुविधाओं का विकास करने के लिए प्रेरित कर सकता है. ध्यान देने की बात है कि यदि ऐसा होता भी है तो भी आने वाले वित्तीय वर्ष के भीतर ऐसा हो पाना संभव नहीं होगा. अलबत्ता, मौजूदा सेवा प्रदाता इस दौरान अपनी सुविधाओं और सेवाओं का दायरा बढ़ा कर ज्यादा लाभ हासिल करने की प्रतिस्पर्धा कर सकते हैं. 

सरकार की घोषणा पर स्वास्थ्य क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र के सुदृढ़ होने से स्वास्थ्य सेवाओं का दायरा बड़ा होगा. एक आंकड़े का हवाला लिया जाए तो देश में हर साल पांच से सात प्रतिशत परिवार केवल किसी गंभीर बीमारी के इलाज के चक्कर में गरीबी रेखा से नीचे खिसक जाते हैं. इतना ही नहीं, देश में स्वास्थ्य बीमा का दायरा भी अभी बहुत सीमित है. कुल आबादी का लगभग 20 प्रतिशत ही स्वास्थ्य बीमा से रक्षित हैं. स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र से बाहर रहे लोगों के अलावा बजट प्रावधान में स्वास्थ्य बीमा पर छूट की सीमा भी 25,000 से बढ़ाकर 40,000 कर दी गई है. इससे लोग अपने स्वास्थ्य के लिए बीमित रकम में इजाफा कर सकेंगे या खास बीमारियों के लिए अलग से उपलब्ध बीमा खरीदने के बारे में भी प्रेरित हो सकेंगे. आम तौर पर लोग पांच लाख तक की रकम का स्वास्थ्य बीमा लेते हैं जो गंभीर बीमारियों के मामलों में जरूरत से कम पड़ जाता है. 

स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र को मिली इस व्यापक मदद का फायदा लोगों को तभी हो सकता है जब ये कम्पनियां बीमे की शर्तों और उपलब्धता में जरूरी सुधारों के बारे में भी सोचें - खास तौर पर गंभीर बीमारियों के बारे में. ध्यान देने की बात है कि यह क्षेत्र मलाई काटने के बाद भी अपने ग्राहकों के हितों की वास्तविक रक्षा करना तो दूर, उस बारे में सोचता भी नहीं है. इनके अस्तित्व का असली फायदा तो अभी तक निजी क्षेत्र के अस्पतालों को ही मिलता रहा है जहां हर बीमारी का इलाज अब बीमा पॉलिसी पर उपलब्ध कुल रकम के आधार पर मनमाने तरीके से होता है. 

स्वास्थ्य एवं स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र से इतर, वित्तीय सेवाओं के मामले में सरकार ने कुछ बदलाव किए हैं जिनका सकारात्मक असर हो सकता है. प्रत्यक्ष विदेशी निवेश को बढ़ावा देने की कोशिश में सरकार ने इनसे जुड़ी प्रक्रिया को सीधा करने की कोशिश की है. इस क्रम में विदेशी निवेश प्रोत्साहन बोर्ड को समाप्त कर दिया गया है. 

जहां तक व्यक्तिगत निवेशकों का सवाल है तो इस बजट में किए गए एक प्रावधान से निवेशक समुदाय खासा नाराज है. वित्तमंत्री ने इसमें शेयर बाजार से होने वाले एक लाख रुपये से अधिक के दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ पर 10 प्रतिशत कर लगाने का प्रस्ताव किया है. इसके दायरे में शेयरों में निवेश केन्द्रित करने वाले म्यूचुअल फंड की वितरित आय भी है. 

जहां तक सेवा क्षेत्र का एक प्रमुख हिस्सा बनाने वाले परिवहन क्षेत्र का मसला है तो रेलवे पर पूंजीगत व्ययों के लिए इस बजट में 1.48 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है. इस धन का उपयोग रेलयात्राओं को सुरक्षित बनाने, रेलमार्गों के विद्युतीकरण, ट्रैकों के दोहरीकरण आदि के साथ ही नए किस्म की ट्रेनें चलाने में किया जाना है. इसी के साथ, 600 रेलवे स्टेशनों के उच्चीकरण का भी प्रस्ताव है. आम नागरिक से सीधे जुड़ने वाली बात इसमें यह है कि आईआरसीटीसी से टिकट लेने पर अब यात्रियों को सेवा प्रभार नहीं देना होगा. 

 वित्तमंत्री ने नागरिक विमानन क्षेत्र को बढ़ावा देने के इरादे से इस क्षेत्र के लिए भी अभूतपूर्व वृद्धि करते हुए 6,602.86 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं. यह रकम पिछले साल आवंटित राशि से तीन गुना से अधिक है. इस धन की सहायता से जेटली चाहते हैं कि हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज में यात्रा कर सके. इसके लिए हवाई अड्डों की क्षमता को पांच गुना बढ़ाकर एक साल में एक अरब लोगों की यात्रा लायक बनाने की योजना है." नागर विमानन मंत्रालय के लिए किए प्रावधान में से दो तिहाई राशि का उपयोग वीवीआईपी उड़ानों के लिए दो नए बोइंग विमान खरीदने के लिए है जबकि क्षेत्रीय हवाई सम्पर्क योजना पर 1014 करोड़ व्यय करने का इरादा है. कर्ज में दबी एयर इंडिया के पुनरुद्धार के लिए 650 करोड़ रुपये की व्यवस्था है. 

 


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